Cloud Computing in Hindi

Cloud Computing in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज इस लेख में हम क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing in Hindi) के बारे में जानेंगे। जिसमें Cloud Computing क्या है? और कैसे हम क्लाउड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अपना स्टोरेज, पैसा, समय बचा सकते हैं। इससे जुड़ी सारी जानकारी आज के इस लेख हम आपको देंगे।

क्या आप जानते हैं? संयुक्त राज्य में 60% से अधिक इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट (Informational Technology Department) क्लाउड सेवाओं पर निर्भर हैं। जिस पर बिजनेस से संबंधी डाटा और यूजर्स का डाटा सुरक्षित रहता है।

हम अपने वीडियो, डॉक्यूमेंट, पिक्चर को अपने स्मार्टफ़ोन और कंप्यूटर पर सुरक्षित रूप से स्टोर करने के लिए भी क्लाउड कंप्यूटिंग का उपयोग करते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण Google Drive और iCloud हैं। जो हमें क्लाउड सेवाएं प्रदान करता है।

Also Read: Freedom Fighters in Hindi

Also Read: Famous Books Written by Dr APJ Abdul Kalam Books in Hindi

क्या है क्लाऊड कम्प्यूटिंग? (What is Cloud Computing in Hindi)

इंटरनेट के माध्यम से कम्प्यूटिंग सेवाओं की डिलीवरी को क्लाउड कम्प्यूटिंग कहा जाता है। इन सेवाओं में नेटवर्किंग, डेटा स्टोरेज, सर्वर, डेटाबेस और सॉफ्टवेयर जैसे कंप्यूटिंग संसाधन शामिल हैं। आसान भाषा में कहा जाए तो अगर आप डाटा को लोकल स्टोरेज डिवाइस के बजाय क्लाउड बेस्ड स्टोरेज पर स्टोर करके एक्सेस करते हैं तो वह क्लाउड कंप्यूटिंग कहलाएगा।

जब हम local computer स्टोरेज में डेटा स्टोर करते हैं, तो हमें इसे एक्सेस करने और प्रबंधित करने के लिए कंप्यूटर पर निर्भर रहना पड़ता है। बल्कि इसके विपरीत Cloud Computing में हम कहीं से भी Data और Resources का उपयोग कर सकते हैं। क्लाउड सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियां उपयोगकर्ता की फाइलों और एप्लिकेशन को रिमोट सर्वर पर स्टोर करती हैं। जिसके बाद यूजर्स उन संसाधनों को इंटरनेट के जरिए एक्सेस कर सकते हैं।

कुल मिलाकर क्लाउड कंप्यूटिंग आधुनिक युग के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। हालांकि क्लाउड कंप्यूटिंग आपके डेटा को स्टोर करने तक सीमित नहीं है। हम क्लाउड सेवाओं को तीन श्रेणियों में विभाजित करते हैं, जिनमें शामिल हैं: Infrastructure-as-a-service (IaaS), Platform-as-a-service (PaaS) और Software-as-a-service (SaaS)। हम इनके बारे में अभी विस्तार से बात करेंगे।

क्लाउड कंप्यूटिंग का इतिहास के बारे में (History of Cloud Computing)

क्लाउड कंप्यूटिंग की शुरुआत 1960 के दशक में मानी जाती है, जब इंटरनेट ठीक से शुरू भी नहीं हुआ था। लेकिन क्लाउड कंप्यूटिंग वास्तव में 1990 के दशक में शुरू हुई जब Salesforce नामक कंपनी ने लोगों को अपनी सेवाएं देनी शुरू कीं। इसके बाद धीरे-धीरे यह सर्विस लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगी।

शुरुआत में क्लाउड कंप्यूटिंग का इस्तेमाल सिर्फ बिजनेस के लिए किया जाता था, लेकिन कुछ सालों बाद यह सर्विस तेजी से पूरी दुनिया में फैल गई। आज के समय में Google, Amazon और Microsoft जैसी कंपनियाँ लोगों को क्लाउड कंप्यूटिंग की सुविधा प्रदान कर रही हैं।

क्लाउड कंप्यूटिंग के फ़ायदे (Benefits of Cloud Computing)

लागत कम होने के कारण कई बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन (Business organization) क्लाउड कंप्यूटिंग सेवा का उपयोग करते हैं, इसके अलावा क्लाउड कंप्यूटिंग में उपयोगकर्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार सेवा का उपयोग करता है और उपयोग की गई सेवाओं के लिए ही भुगतान करता है। क्लाउड कंप्यूटिंग के निम्नलिखित फायदे हैं।

  • आईटी इन्फ्राट्रक्चर की कम लागत
  • कम कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है
  • बेहतर प्रदर्शन
  • कम रखरखाव की समस्याएं और न्यूनतम रखरखाव लागत
  • सॉफ्टवेयर अपडेट में आसानी
  • क्लाउड कंप्यूटिंग सिस्टम और कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच क्षमता
  • बैकअप और रिकवरी
  • डाटा सुरक्षा में वृद्धि

Cloud computing के प्रकार | Types of cloud computing in hindi

क्लाउड कंप्यूटिंग सिस्टम कई प्रकार के होते हैं, क्लाउड कंप्यूटिंग को अलग-अलग कार्यों के अनुसार डिजाइन किया जाता है। परिनियोजन मॉडल के आधार पर चार प्रकार के क्लाउड कंप्यूटिंग हैं: पब्लिक क्लाउड(public cloud), प्राइवेट क्लाउड(private cloud), कम्युनिटी क्लाउड(community cloud) और हाइब्रिड क्लाउड(hybrid cloud)।

पब्लिक क्लाउड (Public cloud)

ऐसे क्लाउड थर्ड पार्टी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर द्वारा संचालित किए जाते हैं जो इंटरनेट के माध्यम से सर्वर और स्टोरेज जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं। इस प्रकार की सेवा में, सभी हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर को क्लाउड प्रोवाइडर द्वारा ही खरीदा और मैनेज किया जाता है।

प्राइवेट क्लाउड (Private cloud)

प्राइवेट क्लाउड किसी भी व्यवसाय या संगठन के लिए है, जो कंपनी के डेटा केंद्र पर स्थित हो सकता है या कंपनी द्वारा थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर द्वारा मैनेज किया जा सकता है।

कम्युनिटी क्लाउड (Community cloud)

इस तरह के क्लाउड को किसी ग्रुप के लिए इसलिए बनाया जाता है ताकि उस ग्रुप और कम्युनिटी के लोग ही इस सर्विस का इस्तेमाल कर सकें।

हाइब्रिड क्लाउड (Hybrid cloud)

यह पब्लिक क्लाउड और प्राइवेट क्लाउड का मिश्रण है, बड़ी बिजनेस कंपनियां हाइब्रिड क्लाउड का इस्तेमाल करती हैं।

(Cloud Computing) क्लाउड कंप्यूटिंग सेवा के तीन मॉड्यूल।

  1. Infrastrucutre as a service (Iaas)
  2. Software as a service (Saas)
  3. Platform as a service(Paas)

1. Infrastructure as a service (Iaas)

यह क्लाउड कंप्यूटिंग की सबसे अधिक लागत प्रभावी श्रेणी है। जिसमें यूजर अपनी आवश्यकता के अनुसार क्लाउड कंप्यूटर से संसाधनों को रेंट पर ले सकता है। इन संसाधनों में डेटा संग्रहण, विज़ुअलाइज़ेशन सर्वर और नेटवर्किंग शामिल हैं।

2. Software as a service (Saas)

यह सेवा ऑन डिमांड एप्लिकेशन सर्विस प्रदान करती है। इसमें यूजर को अपने पर्सनल कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होती है और इसकी कीमत भी बहुत कम होती है।

3. Platform as a service (Paas)

यह सर्विस software application बनाने, टेस्ट करने और बनाए रखने के लिए ऑन-डिमांड वातावरण प्रदान करती है। यह सेवा तुरंत वेब और मोबाइल एप्लिकेशन बनाने के लिए बनाई गई थी, इसके माध्यम से आज एक क्लाउड प्रोवाइडर आपको क्लाउड कंप्यूटिंग में यह सब सुविधा दे सकता है।

Also Read : Chetan Bhagat Books in Hindi

Allso Read : Ratan Tata Biography in Hindi

पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्लाउड कंप्यूटिंग कितने प्रकार की होती है?

उत्तर: यह चार प्रकार के होते हैं:- पब्लिक, प्राइवेट, हाईब्रिड और कम्युनिटी क्लाउड।

प्रश्न: क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाएं क्या हैं?

उत्तर: क्लाउड कंप्यूटिंग सेवा तीन प्रकार की होती है- 1. SaaS (Software as a Service) 2. PaaS (Plateform as a service) 3. IaaS (infrastructure as a service)

निष्कर्ष – Cloud Computing in Hindi

आज के इस आर्टिकल में आपको (Cloud Computing in Hindi) Cloud Computing क्या हैं और इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है इसके बारे में बताया गया। उम्मीद है आपको यह लेख बहुत पसंद आया होगा।

अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं। इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *