freedom fighters in india

Freedom Fighters in Hindi

हम सभी जानते हैं कि हमारे देश को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश प्रभुत्व से आजादी मिली थी और हम सभी भारतीयों को इस आजादी पर बहुत गर्व है। हर साल हम 15 अगस्त को झंडा फहराते हैं और 2-4 देशभक्ति के गीत गाकर घर आ जाते हैं। हमारी आजादी भारत के उन स्वतंत्रता सेनानियों की वजह से है, जिन्होंने हमारे देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। हम इन महान हस्तियों को बदले में कुछ नहीं दे सकते, लेकिन आजादी के दिन कम से कम हम उन्हें याद कर सकते हैं, उनके बारे में जान सकते हैं।

हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए कि हम इस आज़ाद भूमि पर पैदा हुए हैं जिसके लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना खून बहाया है और अपनी वीरता दिखाई है। न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी रहने वाले भारतीयों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए किसी न किसी रूप में अपना योगदान दिया है।

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भारतीय स्वतंत्रता सेनानी

कई ऐसे क्रांतिकारी वीर हैं जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में छोटी सी उम्र में ही अपना सर्वस्व न्यौछावर कर भारत माता की आजादी के लिए अपना सब कुछ सौंप दिया। भारत की स्वतंत्रता के लिए ऐसे क्रांतिकारियों के नाम स्वर्णाक्षरों में लिखे गए हैं।

आज हमारा भारत अंग्रेजों से मुक्त है, लेकिन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, बेईमानी ने इसे बंधक बना रखा है। इससे मुक्ति के लिए हमें एक क्रांति लानी होगी और अपने देश की युवा शक्ति को एक बार फिर जगाना होगा। आज हम अपने भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में पढ़ेंगे और जानेंगे कि कैसे उन्होंने देश की आजादी के लिए जनचेतना और क्रांति जगाई थी।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस

Subhash Chandra Bose 1

हमारे देश के महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती था, उनके पिता कटक शहर के एक प्रसिद्ध वकील थे। सुभाष चंद्र बोस के कुल 14 भाई-बहन थे।

1919 में, वे अध्ययन के लिए विदेश गए, तब वहां उन्हें जलियांवाला हत्याकांड का पता चला, जिससे जानकर वे हैरान रह गए और 1921 में भारत लौट आए। भारत आने के बाद, वे भारतीय कांग्रेस में शामिल हो गए और सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया। उन्हें अहिंसक गांधीजी की बात गलत लगी, जिसके बाद वे हिटलर से मदद मांगने जर्मनी चले गए। जहां उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) का आयोजन किया। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान INA की मदद कर रहे जापान ने सरेंडर कर दिया, जिसके बाद नेता जी वहां से भाग गए। लेकिन कहा जाता है कि 17 अगस्त 1945 को उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इनकी मौत से जुड़े तथ्य आज भी रहस्य बने हुए हैं।

रानी लक्ष्मीबाई

Rani

भारत की स्वतंत्रता में रानी लक्ष्मीबाई का नाम स्वतंत्रता सेनानी के रूप में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, उन्हें युगों युगों तक युद्ध क्षेत्र में उनके साहस और वीरता के लिए याद किया जाएगा। 1857-58 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई का योगदान कितना महत्वपूर्ण था, यह सभी जानते हैं।

रानी लक्ष्मीबाई झाँसी की रानी थी, जो की भारत के उत्तर में  स्थित है उनका जन्म एक महाराष्ट्रीयन परिवार में हुआ था। उस समय डलहौजी भारत का गवर्नर था, उसने यह नियम बनाया कि जिस भी राज्य में राजा न हो, उस पर अंग्रेजों का अधिकार हो जाएगा। तब रानी लक्ष्मी बाई विधवा थीं, दामोदर उनका दत्तक पुत्र था। उन्होंने अंग्रेजों के सामने घुटने टेकने से इनकार कर दिया और अपनी झांसी को बचाने के लिए उनके खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। मार्च 1858 में वे लगातार 2 सप्ताह तक अंग्रेजों से लड़ीं, जिसमें वे हार गईं। इसके बाद वे ग्वालियर चली गईं जहाँ एक बार फिर उनका अंग्रेजों से युद्ध हुआ। 1857 के युद्ध में रानी लक्ष्मी बाई का विशेष योगदान था। उनका नाम भारत के स्वतंत्रता सेनानियों में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है।

लाल बहादुर शास्त्री

lal bhadur shastri

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनके पिता का नाम ‘मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव’ था तथा इनकी माता का नाम ‘रामदुलारी’ था। इनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। इस वजह से सभी उन्हें ‘मुंशीजी’ कहकर बुलाते थे। लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। शास्त्री जी ने देश की आजादी के लिए भारत छोड़ो आंदोलन, सत्याग्रह आंदोलन और असहयोग आंदोलन में भाग लिया था। वे भारत देश के स्वतंत्रता सेनानी थे। आजादी के समय उन्होंने 9 साल जेल में भी बिताए। स्वतंत्रता के बाद, वह गृह मंत्री बने और फिर 1964 में भारत के दूसरे प्रधान मंत्री बने।

1965 का भारत और पाकिस्तान का युद्ध शास्त्रीजी के कार्यकाल में लड़ा और जीता गया। 1966 में जब शास्त्रीजी विदेश दौरे पर थे तब अचानक से दिल का दौरा पड़ने के कारण उनकी मृत्यु हो गई। उनके समाधि स्थल का नाम विजय घाट है।

भगत सिंह

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भगत सिंह भी स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। भारत से ब्रिटिश शासन को जड़ से उखाड़ने के लिए वे कई क्रांतिकारी संगठनों से जुड़े थे। उन्होंने भारत में स्वतंत्रता के बीज बोने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को बंगा, पाकिस्तान में हुआ था। भगत सिंह के पिता का नाम सरदार किशन सिंह संधू और माता का नाम विद्यावती कौर था। भगत सिंह जी सिख थे।

उनके पिता और चाचा दोनों स्वतंत्रता संग्राम में शामिल थे, जिसके कारण उन्हें बचपन से ही देश के प्रति लगाव था और भगत सिंह बचपन से ही अपने देश के लिए कुछ करना चाहते थे। 1921 में उन्होंने असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया, लेकिन हिंसक प्रवृत्ति के कारण भगत ने इसे छोड़ दिया और नौजवान भारत सभा का गठन किया। जिसने पंजाब के युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर उन्होंने आजादी के लिए कई काम किए। 1929 में उन्होंने खुद को पकडवाने के लिए संसद में बम फेंका, जिसके बाद 23 मार्च 1931 को उन्हें राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी दे दी गई।

चंद्रशेखर आजाद

chandrashekhar azad

चंद्र शेखर आज़ाद उग्रवादी विचारधारा और दृढ़ संकल्प के साथ एक स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने अंतिम क्षण तक खुद को अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण नहीं करने की कसम खाई थी और वे देश के लिए लड़े और अपनी अंतिम सांस तक आज़ाद रहे।

चंद्रशेखर आजाद अपने नाम की तरह आजाद थे, उन्होंने आजादी की आग में घी डालने का काम किया था। चंद्रशेखर आज़ाद युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में आगे आने के लिए प्रेरित करते थे, उन्होंने युवा क्रांतिकारियों की एक सेना खड़ी की। वे स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए हिंसा को आवश्यक समझते थे, इसलिए वे महात्मा गांधी से भिन्न कार्य करते थे। अंग्रेजों में चंद्रशेखर आजाद का काफी खौफ था। उन्होंने काकोरी ट्रेन को लूटने की योजना बनाई थी और उसे लूट लिया था। किसी ने उनकी खबर अंग्रेजों को दे दी, जिससे अंग्रेज उन्हें पकड़ने के लिए उनके पीछे पड़ गए। चंद्रशेखर आजाद किसी अंग्रेज के हाथों मरना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने खुद को गोली मार ली और शहीद हो गए।

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने भारत के स्वतंत्रता सेनानियों (Freedom Fighters of India in Hindi) के बारे में जाना कि कैसे उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजादी दिलाई। हमें स्वतंत्रता सेनानियों पर हमेशा गर्व रहेगा। हमें उम्मीद है कि आपको हमारा यह article पसंद आया होगा। अगर अच्छा लगे तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ जरूर शेयर करें।

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