Lotus Temple in Hindi

Lotus Temple in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित लोटस टेम्पल के बारे में लगभग सभी जानकारी विस्तार से समझने वाले हैं। जैसे लोटस टेम्पल किसने और कब बनवाया, इसका नाम लोटस टेम्पल क्यों पड़ा, घूमने का सबसे अच्छा समय आदि। ऐसे ही कई सवालों के जवाब हम इस पोस्ट के माध्यम से देने की कोशिश करेंगे, तो चलिए शुरू करते हैं। लेकिन शुरू करने से पहले आपसे अनुरोध है कि हमारे इस ब्लॉग पोस्ट को अंत तक पढ़ें।

कमल मंदिर के बारे में रोचक जानकारियाँ | Lotus Temple in Hindi

lotus temple
Lotus Temple in Hindi

Lotus Temple in Hindi – कमल मंदिर एक बहुत ही खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यह भारत की राजधानी दिल्ली में नेहरू प्लेस के पास स्थित है। यह एक बहाई पूजा स्थल है। कमल मंदिर अपने कमल जैसे आकार के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

इस मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है और न ही इसमें कोई धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है। यहां का शांत वातावरण प्रार्थना और ध्यान में सहायक होता है और सभी धर्मों के लोग यहां प्रार्थना और ध्यान करते हैं। विभिन्न धर्मों से संबंधित लेख पढ़े जाते हैं। भारत के लोगों के लिए कमल का फूल पवित्रता और शांति का प्रतीक है, और यह भगवान के अवतार का भी प्रतीक है।

Also Read: Uranus Planet in Hindi

Also Read: Chetan Bhagat Books in Hindi

लोटस टेम्पल का इतिहास – Lotus Temple History in Hindi

बहाई धर्म की आस्था से जुड़ा राजधानी दिल्ली में नेहरू प्लेस के पास स्थित लोटस टेंपल का निर्माण बहाई धर्म के संस्थापक बहा उल्लाह ने करवाया था। आपको बता दें कि कमल के फूल के आकार के इस लोटस टेम्पल का निर्माण कार्य नवंबर 1986 में पूरा हुआ था, जिसका उद्घाटन 24 दिसंबर 1986 को हुआ था, जबकि आम जनता के लिए इस मंदिर को नए साल पर 1 जनवरी 1987 को खोला गया था।

लोटस टेम्पल को बनने में करीब 10 साल का लंबा समय लगा था। लोटस टेम्पल दुनिया में बहाई धर्म के सात प्रमुख मंदिरों में से एक है। इसके अलावा बहाई धर्म के अन्य मंदिर कम्पाला, सिडनी, इल्लिनॉइस, फ्रैंकफर्ट, विलमेट, पनामा, आपिया में हैं। लोटस टेम्पल अपनी अद्धितीय वास्तुशिल्प और अनूठी डिजाइन के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।

इस मंदिर को कनाडा में रहने वाले प्रसिद्ध पर्शियन वास्तुकार फरीबर्ज सहबा ने तैयार किया था। यह मंदिर अंतरधार्मिक समानता की भारत की अनूठी संस्कृति को दर्शाता है, यह हर धर्म के लोगों के लिए खुला हुआ है। यह भारत की आधुनिक वास्तुकला का नायाब नमूना है।

आधे खिले कमल के आकार में संगमरमर की 27 बेहद खूबसूरत पंखुड़ियों से बने इस शानदार कमल मंदिर के निर्माण में करीब 1 करोड़ डॉलर की लागत आई थी। वहीं करीब 26 एकड़ जमीन में बने इस मंदिर की आकर्षक डिजाइन को देखने के लिए दुनिया के कोने-कोने से लोग यहां आते हैं।

लोटस टेम्पल नई दिल्ली की टाइमिंग – Timing of Lotus Temple Delhi in Hindi

यह प्रश्न भी अनिवार्य है, आप यह जान लें कि यह मंदिर किस दिन खुलेगा और किस दिन बंद रहेगा, फिर किस समय खुलता है आदि। तो सबसे पहले बता दें कि लोटस टेम्पल पर्यटकों के लिए मंगलवार से रविवार तक खुला रहता है। और यह सोमवार को पूरी तरह बंद रहता है।

समय की बात करें तो गर्मियों में यह सुबह 9.30 बजे या 9.30 बजे से शाम 7.00 बजे तक खुला रहता है, जबकि सर्दियों में यह सुबह 9.30 या 10.00 बजे से शाम 5.30 बजे तक खुला रहता है।

लेकिन कोरोना के बाद इस मंदिर का समय बदल गया है, अब यह मंदिर रविवार को बंद रहता है और बाकी दिनों में सुबह 8 से 10 बजे तक खुलता है और शाम को 4 से 6 बजे तक ही खुलता है और आजकल मुख्य मंदिर कमल मंदिर बंद है। अंदर नहीं जा सकते है |

कमल मंदिर पर कुछ बाते – Few Lines On Lotus Temple in Hindi

  • इस मंदिर की आकृति कमल के फूल जैसी है क्योंकि कमल को शांति, शुद्धता, प्रेम और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
  • बहाई आस्था और श्रद्धा का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर कमल मंदिर है।
  • बहाई धर्म की स्थापना तेहरान के एक पर्शियन अमीर बहा-उल्लाह ने की थी। बहाई धर्म के अनुसार ईश्वर एक ही है।
  • कमल मंदिर नई दिल्ली के कालकाजी इलाके में है।
  • इस कमल मंदिर को बनाने में एक दशक से ज्यादा का समय लगा है। आखिरकार 1986 में इस मंदिर को आम लोगों के लिए खोल दिया गया था।
  • लगभग 700 इंजीनियरों, तकनीशियनों, कामगार और कलाकारों ने मिलकर कमल मंदिर का निर्माण किया।
  • मंदिर में एक बार में 2400 लोग एक साथ आ सकते हैं।
  • यह मंदिर लगभग 40 मीटर लंबा है और 9 तालाबों से घिरा हुआ है।
  • कमल मंदिर को कनाडा के पर्शियन आर्किटेक्ट फरिबोर्ज़ सहबा ने डिजाईन किया था। इस मंदिर की आकृति कमल जैसी होने के कारण इसे कमल मंदिर या लोटस टेम्पल भी कहा जाता है।
  • इस मंदिर को बनाने में इस्तेमाल किया गया मार्बल ग्रीस से मंगवाया गया था।
  • लोटस टेम्पल को कनाडा के एक पर्शियन आर्किटेक्ट फ़ारिबोर्ज़ सहबा द्वारा डिज़ाइन किया गया था। इस मंदिर की कमल जैसी आकृति होने के कारण इसे कमल मंदिर या लोटस टेम्पल भी कहा जाता है।

Also Read: Freedom Fighters in Hindi

Also Read: Famous Books Written by Dr APJ Abdul Kalam Books in Hindi

कमल मंदिर से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. कमल मंदिर की विशेषताएं क्या हैं?

सभी बहाई मंदिरों की तरह, कमल मंदिर की संरचना नौ भुजाओं वाली गोलाकार है। यह भवन 27 मुक्त खड़े संगमरमर के पंखुड़ियों से बना है जो मंदिर के 9 किनारों को बनाने के लिए व्यवस्थित किए गए हैं। अंदर केंद्रीय पूजा हॉल 40 मीटर ऊंचा है और इसकी क्षमता 2,500 लोगों की है।

Q2. कमल मंदिर किसने बनाया?

लोटस टेंपल को कनाडा के फ़ारसी वास्तुकार फ़रीबोर्ज सहबा ने डिजाइन किया था।

Q3. लोटस टेंपल कहाँ स्थित है?

लोटस टेंपल भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है।

Q4. कमल मंदिर किस समय खुलता है?

कमल मंदिर सोमवार को बंद रहता है। यहां फोटो लेने की अनुमति नहीं है। बाकी दिनों में यह मंदिर सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है।

अंतिम शब्द

भारत की राजधानी में स्थित लोटस टेम्पल एक बहुत ही खूबसूरत पर्यटन स्थल है जो सभी धर्मों का सम्मान करता है, यहाँ आप जरूर आये आजकल कोरोना को देखते हुए, यहां मास्क के बिना एंट्री नहीं है, Essay on Lotus Temple in Hindi इस पोस्ट में मैंने लोटस टेम्पल के बारे में जानकारी दी है। अगर आपको कुछ पूछना हो तो हमें कमेंट के माध्यम से बताएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *